तीखी कलम से

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

सियासत दां की गद्दारी ने उसको मार डाला है


------***ग़ज़ल***-----

करो  तुम  शौक  से हमला यहाँ हाथों  में  ताला  है ।
मेरी  आदत  में  शामिल  है  मुझे  गांधी ने पाला है ।।

मालदा  को  छुपा  कर  मीडिया तू फख्र कर लेकिन ।
दिखा बिकना  तेरा सबको तुझे दिल  से  निकाला है ।।

तम्बुओं  में  है जो जीता  वो  वाशिंदा   है  कश्मीरी ।
किसी  सरकार  के  साये  तले  लुटता  निवाला   है ।।

बहन बेटी को खोकर भी वतन  कश्मीर  वह माँगा ।
सियासत  दां  की  गद्दारी  ने उसको मार  डाला है ।।

रखो  भूखा  ये मतदाता ,,  रहें   रोटी  पे  ही  नज़रें ।
चन्द  टुकड़ो  पे  ये  सरकार  चलनी पांच साला है ।।

गोलिया  खा  के  चिल्लाना और खामोश  हो जाना ।
फितरते हिन्द का जज्बा तू किस  साँचे में ढाला है ।।

गुलामी दस्तकें  देती , तू  बस कुर्सी से चिपका  रह ।
तेरे  जालिम   इरादों  पर  उजाला  ही  उजाला  है ।।

कहो मत पीठ का  इसको धँसा सीने  में  है खंजर ।
सराफत में मिटे इस मुल्क का  निकला दीवाला है।।

चुटकियों  में  मसल देने का जज्बा  रोज  सुनता  हूँ ।
नहीं क्या आब है तुझमे या  तेरा दिल  भी  काला है ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी

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