तीखी कलम से
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मंगलवार, 5 अगस्त 2025
हर तरफ़ तिश्नालबी है शह्र में
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2122 2122 212 हर तरफ़ तिश्ना- लबी है शह्र में । सबकी अपनी बेबसी है शह्र में ।। 1 मन्दिर ओ मस्ज़िद को लेकर देखिये फ़िर कहीं चर्च...
1 टिप्पणी:
वस्ल होगा फिर उसी गुलफ़ाम से
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ग़ज़ल 2122 2122 212 दिल बहुत बेचैन हैं यूँ शाम से वस्ल होगा फिर उसी गुलफ़ाम से । जब से आई ये ख़बर आएंगे वो । हसरतें जिंदा हुईं पैग़ाम से ।। बेख़...
रात भर उसने मेरे ख़त को जलाया होगा
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2122 1122 1122 22 हिज्र के बाद उसे होश तो आया होगा । रात भर उसने मेरे ख़त को जलाया होगा ।। 1 बेसबब आती नहीं है ये तबाही की लहर । कुछ ...
मुझे बचाने मेरा नाखुदा नहीं आया
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1212 1122 1212 22 उसे हयात का असली मज़ा नहीं आया । तमाम उम्र जिसे राब्ता नहीं आया ।।1 करीब ला दे जो मंजिल के आस पास मुझ...
दुश्मन से भी हाथ मिलाया जा सकता है
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22 22 22 22 22 22 एक शिगूफ़ा फ़िर से लाया जा सकता है । कोई झूठा ख़्वाब दिखाया जा सकता है ।। 1 उनके वादे पूरे होंगे, नामु...
ये मुहब्बत की परसाई है
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2122 1212 22 ग़ज़ल दर्द है , हिज्र है जुदाई है । ये मुहब्बत की पारसाई है ।1 नींद शब भर नहीं मयस्सर अब । एक आफ़त ये आशनाई है ।।2 ख़ाक हो ज...
ग़ज़ल
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2122 2122 2122 212 जीस्त की हर जंग में बस ज़ख्म खाता रह गया । उम्र भर यूँ ही मुकद्दर आजमाता रह गया ।। है ख़बर हमको नहीं , आयीं बहारें कब यहां...
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