तीखी कलम से

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जी हाँ मैं आयुध निर्माणी कानपुर रक्षा मंत्रालय में तकनीकी सेवार्थ कार्यरत हूँ| मूल रूप से मैं ग्राम पैकोलिया थाना, जनपद बस्ती उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ| मेरी पूजनीया माता जी श्रीमती शारदा त्रिपाठी और पूजनीय पिता जी श्री वेद मणि त्रिपाठी सरकारी प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं| उनका पूर्ण स्नेह व आशीर्वाद मुझे प्राप्त है|मेरे परिवार में साहित्य सृजन का कार्य पीढ़ियों से होता आ रहा है| बाबा जी स्वर्गीय श्री रामदास त्रिपाठी छंद, दोहा, कवित्त के श्रेष्ठ रचनाकार रहे हैं| ९० वर्ष की अवस्था में भी उन्होंने कई परिष्कृत रचनाएँ समाज को प्रदान की हैं| चाचा जी श्री योगेन्द्र मणि त्रिपाठी एक ख्यातिप्राप्त रचनाकार हैं| उनके छंद गीत मुक्तक व लेख में भावनाओं की अद्भुद अंतरंगता का बोध होता है| पिता जी भी एक शिक्षक होने के साथ साथ चर्चित रचनाकार हैं| माता जी को भी एक कवित्री के रूप में देखता आ रहा हूँ| पूरा परिवार हिन्दी साहित्य से जुड़ा हुआ है|इसी परिवार का एक छोटा सा पौधा हूँ| व्यंग, मुक्तक, छंद, गीत-ग़ज़ल व कहानियां लिखता हूँ| कुछ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होता रहता हूँ| कवि सम्मेलन के अतिरिक्त काव्य व सहित्यिक मंचों पर अपने जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों को आप तक पहँचाने का प्रयास करता रहा हूँ| आपके स्नेह, प्यार का प्रबल आकांक्षी हूँ| विश्वास है आपका प्यार मुझे अवश्य मिलेगा| -नवीन

रविवार, 24 मार्च 2013

बे हिचक तुमने जब, बेवफा कह दिया


तेरी   तारीफ   में  उसने   क्या   कह  दिया ।
वह   तो  खामोश  सबकी  जुबां  कर  दिया ॥
मयकशी   की   भी   चर्चा   हुई  जब  कभी ।
तेरे    पैमाने   को ,  मयकदा    कह   दिया ॥



एक   उलझी   हुई   सी , कथा   पढ़   लिया ।
मन  के  सपनों की  सारी, व्यथा  पढ़ लिया ॥
उसकी  जज्बात  लिखने , कलम  जब चली ।
सोच  कर  कुछ  मुझे,  अन्यथा  कह  दिया ॥ 



जिक्र चिलमन की महफ़िल में क्यूं कर दिया ।
चाँद   को   बादलों   ने ,  छिपा   फिर  लिया ॥
दर्द    माँगा   था     मैंने ,   तेरे    प्यार   में ।
तूने   इजहार   में   क्यूँ ,   दवा   रख   दिया ॥



एक   मुद्दत   से   जलता ,  रहा   वह   दिया ।
रोशनी   से   मोहब्बत  , बयाँ    कर    दिया ॥
नूर   आँखों   का   भी  , आज   शरमा  गया ।
बे  हिचक   तुमने   जब, बेवफा  कह   दिया ॥



एक   सहमी  नजर   को,  हया   कह   दिया ।
मैंने  कातिल  को  अहले  फिजा  कह  दिया ॥
जुल्फे  लहरायीं  जब,  क़त्ल   की   चाह  में ।
मैंने  रुखसत  चमन  अलविदा   कह  दिया ॥

                              

         -नवीन मणि त्रिपाठी

26 टिप्‍पणियां:

  1. एक सहमी नजर को, हया कह दिया ।
    मैंने कातिल को अहले फिजा कह दिया ॥

    ....बहुत खूब...बेहतरीन प्रस्तुति...

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  2. एक उलझी हुई सी , कथा पढ़ लिया ।
    मन के सपनों की सारी, व्यथा पढ़ लिया ॥
    उसकी जज्बात लिखने , कलम जब चली ।
    सोच कर कुछ मुझे, अन्यथा कह दिया ॥
    उम्दा अभिव्यक्ति .... बेहतरीन प्रस्तुति....

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  3. बहुत बढ़िया...
    दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥
    लाजवाब शेर...

    सादर
    अनु

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  4. आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-03-2013 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  5. खूबसूरत ग़ज़ल त्रिपाठी जी.

    दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥

    काश ऐसा होता सबके साथ :) होली की शुभकामनायें.

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  6. महा संग्राम के अजेय योद्धा की तरह.......क्या ललकार किया है........क्या मधुर पंक्तियाँ संजोयी हैं....

    इस सशक्त श्रंगार प्रधान...युवा हृदय रचना के लिया साधुवाद .

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  7. एक मुद्दत से जलता , रहा वह दिया ।
    रोशनी से मोहब्बत , बयाँ कर दिया ॥
    नूर आँखों का भी , आज शरमा गया ।
    बे हिचक तुमने जब, बेवफा कह दिया ..

    बहुत ही लाजवाब लिखा है ... मुहब्बत का अन्दाजें बयाँ भी जुदा है ...
    सुन्दर लयात्मक रचना ... होली की बधाई ...

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  8. जिक्र चिलमन की महफ़िल में क्यूं कर दिया ।
    चाँद को बादलों ने , छिपा फिर लिया ॥
    दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥

    बहुत उम्दा सराहनीय प्रस्तुति ,,बधाई नवीन जी
    होली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाए,,,

    Recent post : होली में.

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    रंगों के पर्व होली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  10. बहुत बेहतरीन रचना , होली के पर्व पर आपको ढेर सारी शुभकामनाएं, मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार

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  11. शुकरवार यानी 29-03-2013 की नई पुरानी हलचल परआप की ये रचना लिंक की जा रही है...
    सूचनार्थ...

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  12. तेरी तारीफ में उसने क्या कह दिया ।
    वह तो खामोश सबकी जुबां कर दिया ॥
    मयकशी की भी चर्चा हुई जब कभी ।
    तेरे पैमाने को , मयकदा कह दिया ॥

    बहुत बढिया !


    होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  13. एक मुद्दत से जलता , रहा वह दिया ।
    रोशनी से मोहब्बत , बयाँ कर दिया ॥
    नूर आँखों का भी , आज शरमा गया ।
    बे हिचक तुमने जब, बेवफा कह दिया ॥

    ...लाज़वाब प्रस्तुति...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  14. बहुत सुंदर प्रस्तुति नवीन जी आपको सपरिवार बधाई एवं शुभ कामनाये

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  15. दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥

    लोग तो दवा मांगते हैं आपने दर्द क्यों माँगा ....:))

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    1. heer ji post tk pahuchane ke liye sadar आभार .....प्रेम जब स्वार्थ ke aas paas होता है तो dwa hi मागता है और जब nihswarth और सच्चा होता है तो सिर्फ दर्द मागता है शायद यही सोच kar maine दर्द maga है

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  16. दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥ बहुत सुन्दर ,उम्दा प्रस्तुति
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  17. दर्द माँगा था मैंने , तेरे प्यार में ।
    तूने इजहार में क्यूँ , दवा रख दिया ॥

    भला क्यों होता है ऐसा हर वफ़ा की उम्मीद में ?

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  18. बेहद सुन्दर लाजवाब प्रस्तुति नवीन भाई

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