तीखी कलम से

मेरे बारे में

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जी हाँ मैं आयुध निर्माणी कानपुर रक्षा मंत्रालय में तकनीकी सेवार्थ कार्यरत हूँ| मूल रूप से मैं ग्राम पैकोलिया थाना, जनपद बस्ती उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ| मेरी पूजनीया माता जी श्रीमती शारदा त्रिपाठी और पूजनीय पिता जी श्री वेद मणि त्रिपाठी सरकारी प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं| उनका पूर्ण स्नेह व आशीर्वाद मुझे प्राप्त है|मेरे परिवार में साहित्य सृजन का कार्य पीढ़ियों से होता आ रहा है| बाबा जी स्वर्गीय श्री रामदास त्रिपाठी छंद, दोहा, कवित्त के श्रेष्ठ रचनाकार रहे हैं| ९० वर्ष की अवस्था में भी उन्होंने कई परिष्कृत रचनाएँ समाज को प्रदान की हैं| चाचा जी श्री योगेन्द्र मणि त्रिपाठी एक ख्यातिप्राप्त रचनाकार हैं| उनके छंद गीत मुक्तक व लेख में भावनाओं की अद्भुद अंतरंगता का बोध होता है| पिता जी भी एक शिक्षक होने के साथ साथ चर्चित रचनाकार हैं| माता जी को भी एक कवित्री के रूप में देखता आ रहा हूँ| पूरा परिवार हिन्दी साहित्य से जुड़ा हुआ है|इसी परिवार का एक छोटा सा पौधा हूँ| व्यंग, मुक्तक, छंद, गीत-ग़ज़ल व कहानियां लिखता हूँ| कुछ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होता रहता हूँ| कवि सम्मेलन के अतिरिक्त काव्य व सहित्यिक मंचों पर अपने जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों को आप तक पहँचाने का प्रयास करता रहा हूँ| आपके स्नेह, प्यार का प्रबल आकांक्षी हूँ| विश्वास है आपका प्यार मुझे अवश्य मिलेगा| -नवीन

सोमवार, 19 मार्च 2012

आयुध निर्माणी दिवस

आयुध निर्माणी कानपुर में आयुध निर्माणी दिवस पर आयोजित कविसम्मेलन में मेरे द्वारा पढ़ी गयी रचनाओं  के कुछ खास अंश 




            गुणवत्ता एवम संरक्षा को समर्पित   
                           छंद

आयुध निर्माणी के ही दिवस के संग संग ,देश में प्रगति की मशाल जलवाइए |
गुणवत्ता क्रांति के सपथ को ग्रहण कर ,अस्त्र शस्त्र श्रेष्ठता की शान बन जाइए ||
रूश व अमेरिका भी दौड़  पड़ें शस्त्र हेतु ऐसे  हथियारों को  भी देश में सजाइए |
विश्व में प्रथम शक्ति बनने से पहले ही  आयुधों का विश्व  में बाजार  बन जाइए ||

अनमोल शक्ति का प्रतीक परमाणु शक्ति ऐसी शक्ति धारण का पात्र बन  जाइए |
परमाणु विद्युत् घरों की ही सुरक्षा में, सारे   मापदण्डों  की  समीक्षा  करवाइए ||
तिल तिल जल गया आज है जापान जैसे ऐसे हिंदुस्तान को कदापि ना बनाइये |
भारत  प्रगति  में सुरक्षा का धयान रहे , एक  बार  देश का भरोस  ना  गावाइये||

                 मुक्तक

आयुध के कर्ण धारों  का करवा  रुक नहीं सकता |
यहाँ उत्थान का दीपक कभी भी बुझ नहीं सकता ||
जान   देकर  करेंगें  हर   जरूरत   देश  की   पूरी |
ये भारत का तिरंगा है कभी भी झुक नहीं सकता ||

आयुधों  का चमन  फिर से गुले गुलजार हो जाये |
देश  ये  आयुधों  का इक नया  बाजार  बन  जाये ||
यहाँ  जज्बा  है  मजदूरों   में  तश्वीरे   बदलने  की |
ये  लहरें  हौसलों  की  हैं  मंजिले  पार  कर  जाएँ ||

सुरक्षा राष्ट्र की  खातिर  भरोसा  आज  है तुम  पर |

शरहदों के जवानों को भी अब तो नाज है तुम पर ||
बढ़ाना देश की खातिर है  तुमको  आज  उत्पादन |
सिपाही आयुधों  के तुम देश को नाज है  तुम  पर ||

यह मुक्तक चीन की चेतावनी पर लिखा गया

तुम्हारी हर नियतसे हम भी वाकिफ हो चुके हैं अब |
शस्त्र मेरे  तेरी खिदमद  में वाजिब बन चुके हैं अब ||
यहाँ कश्मीर  अरुणांचल पर  गर  नजरें  उठी तेरी |
समझ लेना प्रलय के दिन मुनासिब हो चुके हैं अब ||



नफरतें  मत करो इतना  की  कत्लेआम हो जाये |
हसरतें  हों  भी  कुछ  ऐसी  देश  के नाम हों जाएँ ||
कफ़न लिपटे तिरंगे का वतन की शान की खातिर |
तेरे  जजबो  लहू  में  फिर  से हिंदुस्तान हो जाये ||



शरहदों पर शालामत की दुआ उसने जो की होगी |
किसी प्रीतम के ख्वाबों में नीद उसकी उडी होगी ||
खबर क्या थी तिरंगा ओढ़ के आयेंगे वो इक दिन |
देश की लाज की खातिर जिंदगी भर जली होगी ||

सोमवार, 5 मार्च 2012

क्रिकेट बनाम देश

   क्रिकेट बनाम देश
                              
   -- नवीन मणि त्रिपाठी
                              
                              G 1 / 28 अरमापुर इस्टेट कानपुर
                              
                                  फोन - 09839626686

 भारत क्रिकेट के खेल में ,
विश्व चैम्पियन बना .
देश का सम्मान बढ़ा .
२८ वर्षों बाद पूरा हुआ सपना ,
वर्डकप  हुआ अपना .
पूरे देश में ऐतिहासिक जश्न मनाया गया .
उद्योग पति से लेकर मजदूर तक में ,
जागृती आयी ,
ख़ुशी के पल में पटाखों को जलाया गया .
रातों रत टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी ,
देश के नायक बन गये .
देश की तकदीर के निर्णायक बन गये .
देश का हर नागरिक आत्म सम्मान से ओत प्रोत हो गया .
सचिन धोनी युवराज से अभिभूत हो गया .
हर गली कूचों व् चौराहों पर,
 विश्व विजेता का उफान देखा गया .
ढेरों मिठाइयों जोरदार जुलूस के नारों से,
 खिलाडियों का सम्मान देखा गया .
भारत की उन्नति का प्रतीक है क्रिकेट .
सभी ग्यारह खिलाडी हैं देश के विकेट .
देश की खिलाडी क्रीज पर जम कर मैच जीतते हैं ,
तो देश का सर ऊंचा हो जाता है .
यही विकेट जल्दी गिर कर मैच हारते हैं ,
तो देश का सर शर्म से झुक जाता है .
गाँधी सुभाष और भगत सिंह के देश के सर में ,
बी ० सी ० सी ० आई ० की स्प्रिंग लग गयी है .
देश की सोच बदल गयी है .
बी ० सी ० सी ० आई ० की टीम की जीत ,
से सर उठ जाता है .
और हार से सर झुक जाता है .
*        *        *         *         *       *           *        *

सर नहीं झुकता अब ,
देश में हो रही हजारों निर्दोषों की हत्त्याओं पर .
देश के भ्रष्टाचारियों के धन से लदे स्विस बैंकों पर .
हजारों किसानों की आत्म हत्याओं पर ,
पडोसी देशों द्वारा कब्ज़ा की हुई जमीनों पर .
हमारे करोड़ पति , अरबपति खिलाडियों ने,
 पसीना बहाया है.
देश का मनोरंजन कराया है .
हमारे मंत्री राष्ट्रपति ने मैदान में जाकर,
 हौसला बढ़ाया है .
हमारे सेना अध्यक्षों ने,
 कर्नल जैसा पद देकर सम्मान बढाया है .
देश की राष्ट्रपति ने उन्हें भोज पर बुलाया .
B.C.C.I. करोड़ों रुपया खिलाडियों पर बरसाया .
अनेक कंपनियों ने.
 खिलाडियों को पुरस्कारों से नवाजा .
सबने बनाया उन्हें ख्वाजा .
देश के नायकों ने जलाई ,
पवित्र भारतीय संस्कृति की होली .
महगी शराब शैम्पेन से .,
मैदान में खेली होली .
इन नायकों ने दिखाया ;
देश के युँवाओं को शैम्पेन का असर .
बोतल की ताकत की हो गयी बच्चों में खबर .
दीमक की तरह भारतीय मस्तिष्क को ,
चाट रहा है यह खेल .
बड़ी बड़ी कंपनियों का बढ़ा रहा है सेल .
सब कुछ भूल कर ,
चैन से मजा लेने की क्षमता देता है .
हमारे जननेताओं को ,
क्रिकेट का नशा स्टेडियम में बुला लेता है .
राष्ट्रीय खेल हाकी का तो बुरा हाल है .
कबड्डी कुस्ती  खोखो तैराकी सब कुछ बेहाल है .
भारतीय RASHTREEY   नेताओं को हम चुनौती दे सकते हैं .
हमे पता है वे क्रिकेट को छोड़ कर किसी अन्य ,
खेल के पाँच खिलाडियों के नाम भी ,
 नहीं बता सकते हैं .
राष्ट्रीय शहीदों के बेटों को,
 वे कर्नल नहीं बना सकते हैं ,
उनकी बिधवाओं को वे ,
पार्स एरिया बँगलें नहीं बनवा सकते हैं ,
वे भारतीय मुख्य मंत्री हैं .
देश के सन्तरी हैं .
वे क्रिकेट के खिलाडियों का सम्मान करते हैं .
मैदान पर पसीना बहाने वालों को लाखों,
 का दान करते हैं .
रोज जब किसी प्रदेश का जवान .
सजोता है भारत का सम्मान .
शहीद बन के ,
भारत माँ की गोदी में सो जाता है .
नहीं दे पाते हैं हम उन्हें ,
क्रिकेट के खिलाडियों जैसा सम्मान .
कहाँ चला जाता है ,
हमारा स्वाभिमान ?
कुछ ही दिनों में ,
हम उन्हें भूल जाते हैं .
बलिदानियों के लिए ,
 राष्ट्रीय धर्म का वसूल गवांते हैं ,
शहीदों की विधवाओं और अनाथ बच्चों का ,
कितना हो पता है सम्मान ?
अगर कुछ दे सकते हो ,
तो भारत माँ का मत करो अपमान .
शहीदों के बच्चों व् विधवाओं को ,
उचित सम्मान दिलाओ .
राष्ट्रपति भवन में ,
उन्हें भी भोज पर आमंत्रित कराओ .
अगर तुम मैदान के
शराब के नशेबाजों पर करोड़ों ,
लुटा सकते हो ,
तो देश के शहीदों को,
 कैसे भुला सकते हो ?
जाओ प्राश्चित करो ,
उनकी कुर्बानियों को,
 याद करो .
उनके परिवार को सम्मान दिलाओ
सचिन और धोनी के बदले ,
उन्हें भी कर्नल व् लेफ्टिनेंट बनाओ .
शायद इतिहास तुम्हें माफ़ कर देगा .
वरना एक बार फिर यही इतिहास,
 गुलामी की कालिख से .
 तुम्हारा नाम लिख देगा .
राज नीति व् प्रशासन के मेहमानों .
वास्तविक विजेता को पहचानों .
सोच नहीं बदली तो ,
भारत का ज्वलंत परिवेश हो जायेगा.
इस बार चुनाव का मुद्दा भी ,
क्रिकेट बनाम देश हो जायेगा .
क्रिकेट बनाम देश हो जायेगा .

                    -- नवीन मणि त्रिपाठी

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

महिला आरक्षण

महिला आरक्षण


वह प्रतीक है,
किसी सभ्य समाज की .
वह पूजनीया है ,
भारतीयों के ताज की .
अर्धांग है,
भारतीय पुरषतत्व की .
शशांक है ,
मानवीय ममत्त्व की .
सबने देखा उसे ,
अन्तरिक्ष की सैर करते .
वायु यान उड़ाते जलयान चलाते.
गोलियां बरसाते देश पर कुर्बान होते .
हिंदुस्तान की बागडोर सँभालते .
सब कुछ बेहतर करने की क्षमता है .
फिर भी पुरुष प्रधान मानसिकता ,
चिल्ला चिल्ला कर कहती है ,
नारी का पुरषों से भला क्या समता है ?
* * * * * *

युगों युगों तक नारी को ,
कई तह पर्दों में लपेटा गया .
आपने स्वार्थ के लिए लोगों को परोसा गया .
उपभोग की बस्तु की उपमा दी गयी .
तो कहीं शोषण के मानचित्रों में .
अलंकृत की गयी .
धर्म के आडम्बर में ,
कहीं देवी तो ,तो कहीं माँ तो कहीं
बहन का सम्मान मिला .
यह सारा कपोल कल्पित कमल ,
खोखली सामाजिकता के आसपास ही खिला .
वर्षों से दबाया गया नारी जीवन को ,
शायद ...............
अब वे नहीं सहेंगी .
दृढ़ हो रहीं हैं भारतीय नारियां .
महिला आरक्षण ले के रहेंगीं .

* * * * * *

आज एक नर्सिंग होम में .
एक महिला आयी .
खुद को एक महिला डाक्टर को दिखाई .
डाक्टर मैडम ...
जाँच करके बताइए,
मेरे पेट में नर है या नारी ?
अगर नारी है ....... .
तो जन्म देना होगा भारी .
मुझे सिर्फ कुलदीपक चाहिए .
बंश परम्परा का द्द्योतक चाहिए .
तभी माँ के उदर से ,
निर्दोष बच्ची की बिलखती सी आवाज आयी .
माँ के फैसले से बच्ची अधिक तिलमिलाई .
ओ... मेरी ...इक्कीसवी शदी की माँ .........???
तुम तो नारी हो...... नारी की सोच ....
सिर्फ पार्लियामेंट में
बिल पास करवाने से क्या होगा ?
हमारी झोली में भी मानवता का अधिकार भर दे .
अगर पास करना है ..........
तो अपनी ही कोख में .......
महिला आरक्षण का बिल पास कर दे .
महिला आरक्षण का बिल पास कर दे .

शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

नुक्ता चीं की भी सही तहजीब होनी चाहिए ।।

दिल की  जज्बातें बयां तरतीब होनी  चाहिए ।
नुक्ता चीं  की भी सही तहजीब  होनी चाहिए ।।

हर तरफ तो धुंध है ,छाया   हुआ  कुहरा घना ।
कातिलों की  बस्तियां  करीब   होनी चाहिए ।।

शायरों के शेर  को  करते हैं वो  अक्सर  फ़ना ।
बच  के  आये  शायरी,  नसीब   होनी  चाहिए ।।

क्यों सहादत माँगते हो उनके रुतबे की  भला ।
उनकी हिम्मते जमीर तो गरीब होनी चाहिए ।।

वह कहानी इश्क की, लिखता  रहा  वर्षों  से है ।  
ये   कहानी   भी   बड़ी , अजीब  होनी  चाहिए ।।

गर  मुहब्बत   है जरूरी, अपनी ही बेगम  भली ।
शर्त   ये   बेगम   मेरी,   हबीब   होनी   चाहिए ।। 

हर  कलम तारीफ लिखती जा रही  इस दौर में । 
वह   कलम   मेरे   लिए   रकीब   होनी  चाहिए।।

                                    नवीन  

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

तेरी आँखों में ......

तेरी आँखों में ......
                     


ग़ज़ल  की  तश्नगी  जरूर  तेरी  आँखों   में |
मीठे   एहसास  का  सरूर 
तेरी  आँखों  में ||

आइना  ने    अक्स , जब  तुझको  दिखाया |
बे  अदब  आ  गया , गुरूर   तेरी  आँखों  में ||


नज़र नज़र से मिली मुश्किलों के बाद मगर |
खास  तश्वीर   लगी   दूर    तेरी   आँखों    में ||

सुबूत दिल ने दिया दिल के सबब से तुमको |
है  बेवफाई   का    फितूर   तेरी    आँखों   में ||

जाम छलके भी हैं अक्सर यहाँ सलीके बिन |
मगर    है   कीमती   सहूर   तेरी   आँखों  में ||

तलाश   मंजिलों  के  आस  पास  से गुजरी |
मिली  वो  जन्नतों  की  हूर  तेरी आँखों में ||

जुल्फें हर वक्त क़यामत   का  जुल्म ढाती हैं |
लाल  डोरे  भी   हैं   मशहूर  तेरी   आँखों  में ||

दुआ मांगी थी जो मौला से मोहब्बत खातिर |
नफरतें   आयी   थीं   भरपूर  तेरी  आँखों  में ||

हार   कर  बैठ  गया  था  मैं  अधेरों  से  यहाँ |
पा  गया  जिंदगी  का   नूर  तेरी    आँखों  में ||

छुपा  छुपा  के  जतन लाख कर लिया तुमने |
बे   पर्दा   इश्क    है  हुजूर,  तेरी   आँखों   में ||

जब  भी  तनहा हुए, यादों के समंदर में गिरे |
अश्क  ढलने  लगे   मजबूर   तेरी  आँखों  में ||

हो  के  बेचैन  जब  मैं  तुझको  भूलना चाहा |
दिखा   है  मेरा   ही   कसूर   तेरी  आँखों  में ||

                          नवीन


शनिवार, 21 जनवरी 2012

सियासत में शातिरों का इजाफा कुछ और है ....

सियासत में शातिरों का इजाफा कुछ और है ....
                                                               नवीन

इस मुल्क के अमन का तकाजा  कुछ और है |
सियासत में शातिरों का इजाफा कुछ और है ||


बूढा  फ़कीर   देश   की  तश्वीर  क्या  बदले |
खुदगर्ज  ज़माने  का  शिगूफा  कुछ  और है ||

ढहने   लगे   मकान   क्यों   ईमानदार   के |
शक को यकीन ने भी  तराशा  कुछ और है ||

ढूढ़ा   था  एक   नूर    उम्मीदों   के  वास्ते |
पर वक्त पर लगा की तलाशा  कुछ और है ||

ख़त लिख रहे हैं रोज रियाया के लिए खूब |
मजबून है तो खास ,लिफाफा कुछ और है ||

दूकान  चल   रही है  यहाँ  हक़  खरीद कर |
धंधे  का हकीकत  में  मुनाफा कुछ और है ||

कागज में हैसियत का है वो आम आदमी |
देखा  चुनाव  में  तो  सराफा  कुछ और है ||

इंशानियत  की कद्र से वाकिफ नहीं थे जो |
उनको जम्हूरियत ने नवाजा कुछ और है ||

संसद में कसम खाते है हर कौम की खातिर |
मजहब के लिए उनका तमाशा कुछ और है ||

कुर्सी  पे  बैठ पी  गए  दौलत  वो मुल्क  की |
लगता है ज़माने को वो प्यासा कुछ और है ||

 

सोमवार, 16 जनवरी 2012

मेरा भारत महान है .

देश की बहुरंगी आकृति .                                              
निरूपति करती है हमारी संस्कृति .                                
हमारी सभ्यता,                                                                 
 विश्व की श्रेष्ठ सभ्यताओं में से एक है .            
हमारी भाषा वेश भूषा ,
सब कुछ अनेक है .
अनेकता में एकता है .
यही तो विशेषता है .
गत वर्षों में हमने ,
अनेक सभ्यताओं व संस्कृति का विकास किया है .
इस दर से किसी देश ने ,
कहाँ सभ्यता का विकास किया है ?
हमारे प्राचीन परिवेश बदल चुके हैं .
हम नूतन मौलिकता में प्रखर हो चुके हैं .
हमारी चेतना संयुक्त के बजाय ,
एकाकी जीवन की ओर उन्मुख है .
आधुनिकता का धरातल हमारे सन्मुख है .
संवेदनशीलता ...
हमारी  प्रगति में बाधक है .
देश की उन्नति में अवरोधक है .
संवेदनाओं को हमने ,
धुएं में उड़ना सीख लिया है .
हो रही किसानों की आत्म हत्त्याओं पर ,
मुस्कुराना सीख लिया है .
हमने सीख लिया है ,
बहू बेटियों को जलाना.
शोषण के सेज पर नारियों को लिटाना .
संस्कारों के क्षेत्र  में हमने ,
अभूत पूर्व परिवर्तन किया है .
बूढ़े माँ बाप को दूर किया है .
अब वे हमें अनावश्यक  भार लगते हैं .
इसलिए उन्हें घर के बजाय आश्रम में रखते हैं .
जाति धर्म की विलुप्तप्राय खाइयों का ,
 जीर्नोध्वार किया है .
धर्म निरपेक्षता पर भी करारा वार किया है .
भ्रष्टाचार का आधुनिकतम रूप ,
हमारा नया अनुसंधान है .
हमारी नयी तकनीक से पूरा विश्व हैरान है .
आनर किलिंग का पेटेंट कराने का हमें ,
पूरा अधिकार है .
क्यों की यह
हमारे तुच्छ जनमानस को स्वीकार है .
हमारी तकनीक से जाँच एजेंसियों को ,
सुबूत नहीं मिलता है .
इससे हमारी योग्यता को बल मिलता है .
हम आतंक वाद उग्रवाद नक्सलवाद को ,
हासिल कर चुके हैं .
अदभुद राष्ट्र भावना के अंतर्राष्ट्रीय पुरष्कारों की दौड़ ,
में शामिल हों चुके हैं .
जाति वाद क्षेत्रवाद की भावना को ,
विकृत रूप दिया जाये .
थोडा सा जहर और घोल दिया जाये .
तो सम्भव है .......
गिरी राष्ट्र भावना का अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार ,
तुम्हारा देश पा जाये .
इक्कीसवीं सदी का प्रथम चरण .
प्रगति का हो चुका है अनावरण .
हर तरफ घोटालों का भरमार .
टूट रहा अर्थ शक्ति द्वार .
अपराध जगत के चक्रवात में ,
जन नायकों का योगदान है .
सोचो .....................
कितना सुरक्षित देश का स्वाभिमान है ?
शदी के प्रथम चरण का ,
यही सोपान है .
मानवता की अवनति ,
संवेदनाओं का बलिदान है .
जी हाँ तुम गर्व से कहो ..........
और खूब कहो ......
मेरा भारत महान है .
मेरा भारत महान है .